चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम
सिसकारी गांव में मृतक फगनी देवी की बहु बुधन देवी (32) हाल-चाल लेने आए
मेहमानों के लिए चावल और साग बना रही थीं. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया
कि उनकी सास का गांव में इससे पहले कभी किसी के साथ झगड़ा नहीं हुआ था. वह
पूजा पाठ करती थी, लेकिन हर दिन नहीं. वह भी गांव की देवी और सरना माई
(आदिवासियों की देवी) की पूजा करती थी.
उन्होंने यह भी बताया कि घटना की रात (शनिवार की रात) इतना हो-हल्ला होने के बाद भी उसकी आंखें नहीं खुली. पति बाक़ी दिनों की तरह हंड़िया पी कर सोया था, वह भी नहीं जग पाया. सुबह होने पर पता चला कि उसकी सास को गांव के लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला है.
बुधन देवी के चार बेटे हैं. कोई भी स्कूल नहीं जाता है. पति बिंदो उरांव खेती करते हैं. साल के छह महीने वह ईंट भट्ठा में काम करने हज़ारीबाग जाते हैं.
इनके घर से दो सौ क़दम की दूरी पर दूसरे मृतक सुना उरांव का घर है. घर में उनकी बेटी हीरा उराईन और उनके कुछ और सगे संबंधी मौजूद थे. हीरा घटना के बाद अपने ससुराल लोहरदगा से यहां आई हैं. पूछने पर बताया कि मां सुनी उराईन और भाई सनिका उरांव को पुलिस ले गई है.
वहीं चापा उरांव और पीरी देवी के घर में कोई नहीं था. वारदात स्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बताया कि सभी को सिसई थाना ले जाया गया है. सिसई थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर सुधीर प्रसाद साहू ने बताया कि परिजनों की सुरक्षा को देखते हुए इन्हें थाना बुलाया गया है.
सिसई थाना पहुंचने पर बाहर बने आगंतुक कक्ष में सभी परिजन बैठे मिले. चापा उरांव और पीरी देवी की बहू पैरबा देवी (25) ने बताया कि मुर्गा गांव में महिला भगत के पास वह भी गई थीं. वहां उसने अपने आंचल से चावल निकाल कर दिया. जिसे देखने के बाद महिला ओझा ने कहा कि तुम्हारे घर में ही कोई है जो गांव को परेशान कर रहा है.
पैरबा ने साफ तौर पर कहा कि उससे सास-ससुर डायन थे. उन्हीं की वजह से उनका बच्चा भी बीमार रहता है. हालांकि उन्हें दुःख है कि गांव वालों ने मिलकर उनकी हत्या कर दी. उसकी बात से पति फेकू उरांव (28) भी सहमत दिखे.
वहीं सुना उरांव की पत्नी सुनी उराईन (55) ने बताया कि देर रात जब उसके पति को लोग घर से निकाल रहे थे, तो वह उन्हें बचाने आगे आई. इस दौरान लोगों ने उसके हाथ पर भी डंडे मारे. वह अपना चोट से फूला हाथ दिखाते हुए कहती हैं बेटा बचाने आया तो उसे भी मारने लगे. वह डर के मारे भाग गया.
पास खड़ा बेटा सनिका उरांव (24) ने बताया कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई अधूरा छोड़ अब वह मनरेगा मज़दूर है और खेती करता है. उसने यह भी बताया कि महिला समूह में जमा हुए पैसे से सिसकारी से मुर्गा आने के लिए सभी लोगों का किराया (5300 रुपए) दिया गया था.
वहीं मुर्गा गांव में पहुंचने पर ओझाओं के बारे में पता किया तो किसी भी गांववालों ने उसके बारे में बताने से साफ़ इनकार कर दिया.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के हवाले से हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़ झारखंड में 523 महिलाओं की हत्या डायन होने के आरोप में की गई है. यह सभी हत्याएं साल 2001 से 2016 तक हुई हैं. झारखंड पुलिस की वेबसाइट पर इससे संबंधित किसी प्रकार का डेटा जारी नहीं किया गया है.
वहीं डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 के मुताबिक़ ऐसे मामलों में अधिकतम छह माह की सज़ा और दो हज़ार रुपए जुर्माना लगाया जाता है. आशा एनजीओ के सचिव अजय कुमार जायसवाल बताते हैं कि यह इतना कमज़ोर क़ानून है कि इसके तहत गिरफ़्तार हुए ओझा तुरंत बाहर आ जाते हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि घटना की रात (शनिवार की रात) इतना हो-हल्ला होने के बाद भी उसकी आंखें नहीं खुली. पति बाक़ी दिनों की तरह हंड़िया पी कर सोया था, वह भी नहीं जग पाया. सुबह होने पर पता चला कि उसकी सास को गांव के लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला है.
बुधन देवी के चार बेटे हैं. कोई भी स्कूल नहीं जाता है. पति बिंदो उरांव खेती करते हैं. साल के छह महीने वह ईंट भट्ठा में काम करने हज़ारीबाग जाते हैं.
इनके घर से दो सौ क़दम की दूरी पर दूसरे मृतक सुना उरांव का घर है. घर में उनकी बेटी हीरा उराईन और उनके कुछ और सगे संबंधी मौजूद थे. हीरा घटना के बाद अपने ससुराल लोहरदगा से यहां आई हैं. पूछने पर बताया कि मां सुनी उराईन और भाई सनिका उरांव को पुलिस ले गई है.
वहीं चापा उरांव और पीरी देवी के घर में कोई नहीं था. वारदात स्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बताया कि सभी को सिसई थाना ले जाया गया है. सिसई थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर सुधीर प्रसाद साहू ने बताया कि परिजनों की सुरक्षा को देखते हुए इन्हें थाना बुलाया गया है.
सिसई थाना पहुंचने पर बाहर बने आगंतुक कक्ष में सभी परिजन बैठे मिले. चापा उरांव और पीरी देवी की बहू पैरबा देवी (25) ने बताया कि मुर्गा गांव में महिला भगत के पास वह भी गई थीं. वहां उसने अपने आंचल से चावल निकाल कर दिया. जिसे देखने के बाद महिला ओझा ने कहा कि तुम्हारे घर में ही कोई है जो गांव को परेशान कर रहा है.
पैरबा ने साफ तौर पर कहा कि उससे सास-ससुर डायन थे. उन्हीं की वजह से उनका बच्चा भी बीमार रहता है. हालांकि उन्हें दुःख है कि गांव वालों ने मिलकर उनकी हत्या कर दी. उसकी बात से पति फेकू उरांव (28) भी सहमत दिखे.
वहीं सुना उरांव की पत्नी सुनी उराईन (55) ने बताया कि देर रात जब उसके पति को लोग घर से निकाल रहे थे, तो वह उन्हें बचाने आगे आई. इस दौरान लोगों ने उसके हाथ पर भी डंडे मारे. वह अपना चोट से फूला हाथ दिखाते हुए कहती हैं बेटा बचाने आया तो उसे भी मारने लगे. वह डर के मारे भाग गया.
पास खड़ा बेटा सनिका उरांव (24) ने बताया कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई अधूरा छोड़ अब वह मनरेगा मज़दूर है और खेती करता है. उसने यह भी बताया कि महिला समूह में जमा हुए पैसे से सिसकारी से मुर्गा आने के लिए सभी लोगों का किराया (5300 रुपए) दिया गया था.
वहीं मुर्गा गांव में पहुंचने पर ओझाओं के बारे में पता किया तो किसी भी गांववालों ने उसके बारे में बताने से साफ़ इनकार कर दिया.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के हवाले से हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़ झारखंड में 523 महिलाओं की हत्या डायन होने के आरोप में की गई है. यह सभी हत्याएं साल 2001 से 2016 तक हुई हैं. झारखंड पुलिस की वेबसाइट पर इससे संबंधित किसी प्रकार का डेटा जारी नहीं किया गया है.
वहीं डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 के मुताबिक़ ऐसे मामलों में अधिकतम छह माह की सज़ा और दो हज़ार रुपए जुर्माना लगाया जाता है. आशा एनजीओ के सचिव अजय कुमार जायसवाल बताते हैं कि यह इतना कमज़ोर क़ानून है कि इसके तहत गिरफ़्तार हुए ओझा तुरंत बाहर आ जाते हैं.
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