स्पेन ने गैलियन के हिस्से पर अपना दावा करने में दिलचस्पी

ट्रंप और इमरान ख़ान की मुलाकात के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी पत्रकारों से बात की.
उन्होंने कहा कि ये मुलाकात पहले से तय थी और इस मुलाकात में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने तीन मुद्दों पर बात की और दो टूक बात की.
उन्होंने कहा, "कश्मीर, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के मुद्दे पर बात हुई. कश्मीर के हालात पर प्रधानमंत्री ने खुलकर राष्ट्रपति ट्रंप से बात की. इमरान ख़ान ने साफ तौर पर कहा कि एक मानवीय संकट खड़ा हो चुका है. 80 लाख लोग एक खुली जेल में हैं और उनके जितने बुनियादी हक़ हैं, ख़त्म हो गए हैं. हालात बहुत बिगड़ चुके हैं."
कुरैशी ने कहा, "उन्होंने ये भी कह दिया कि अगर भारत किसी की सुनेगा तो वो अमरीका है और अमरीका को अपना किरदार अदा करना चाहिए. उनके दिमाग में इस चीज़ को लेकर शक नहीं है कि दोनों के आगे आने से मसला हल होगा. अगल मसला हल करना है और वहां ख़ून खराबे से बचना है, तो फिर अमरीका को या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अपना किरदार अदा करना होगा. इमरान ख़ान ने साफ़ तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप को ये पैगाम दिया."
कुरैशी के मुताबिक ईरान के मुद्दे पर भी बात हुई और प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि बगैर सोचे समझे ईरान पर कोई कार्रवाई की जाती है तो इसके भयानक परिणाम होंगे.
वह 8 जून 1708 की तारीख थी जब कोलंबिया के कार्टाजेना तट के पास स्पेन का सैन जोस गैलियन लपटों में घिर गया था.
स्पेन का यह जहाज़ दोपहर से ब्रिटेन के ख़िलाफ युद्ध लड़ रहा था. लेकिन रात होते-होते 62 तोपों वाला यह जहाज़ कैरीबियाई सागर में समा गया.
जहाज़ के साथ करीब 600 लोग और 20 अरब डॉलर कीमत का सोना, चांदी और जवाहरात डूब गए.
सदियों तक सैन जोस गैलियन समुद्र की तलहटी में गुम रहा. 2015 में इस जहाज़ का रहस्य उजागर होना शुरू हुआ, जब कोलंबिया की सरकार ने आधिकारिक रूप से एलान किया कि उस जहाज़ को ढूंढ लिया गया है.
गैलियन के कप्तान जोस फर्नांडेज़ डि सैंटिलन को पता था कि उत्तराधिकार की लड़ाई में शामिल ब्रिटेन के जहाज़ कार्टाजेना में हमला करने के इंतज़ार में होंगे.
कार्टाजेना में इस जहाज़ को मरम्मत के लिए थोड़ी देर रुकना था. उसके बाद उसकी अगली मंज़िल क्यूबा का हवाना थी और फिर उसे स्पेन जाना था.
कप्तान ने योजना के मुताबिक यात्रा जारी रखी. 8 जून की शाम को सैन जोस के ख़ज़ाने के लिए युद्ध शुरू हो गया.
कार्टाजेना के नैवेल म्यूज़ियम ऑफ़ दि कैरीबियन के क्यूरेटर गोंज़ालो ज़ूनिगा का कहना है कि पिस्तौल, तलवार और चाकुओं से लैस ब्रिटिश नौसैनिकों ने तीन बार गैलियन पर चढ़ने और उस पर कब्जा करने की कोशिश की.
वह कहते हैं, "सैन जोस युद्ध जीत रहा था। लेकिन.. हमें नहीं मालूम आख़िरी क्षणों में उसकी क्या स्थिति थी."
हो सकता है कि गैलियन का एक पतवार नष्ट हो गया हो या जहाज पर मौजूद लोगों ने कप्तान के ख़िलाफ़ बगावत कर दी हो- ज़्यादातर लोग नागरिक थे और किसी के आदेश के नीचे नहीं थे.
यह तो निर्विवाद है कि कोई भी पक्ष यह नहीं चाहता था कि गैलियन और उसका ख़ज़ाना डूब जाए.
ज़ूनिगा का मत है कि सैन जोस को सरेंडर करने और खाली हाथ स्पेन जाने की जगह कप्तान ने ख़ुद जहाज के बारूद में आग लगा दी होगी और उसे अपने हाथों से नष्ट कर दिया होगा.
बगोटा से आई सैलानी बिबियाना रोजस मेजिया कहती हैं, "कैरीबिया बहुत जादुई है." मेजिया ने अपने परिवार के साथ इस्ला द्वीप के तट पर पूरा दिन बिताया है. यह यहां का सबसे बड़ा द्वीप है.
"यह जादुई यथार्थ हमारे देश में है. हम नहीं जानते कि असल में सैन जोस गैलियन पर कितना खजाना है. यह कोई बड़ी किंवदंती भी हो सकती है."
सैन जोस गैलियन मई 1708 के आखिर में पनामा
27 नवंबर 2015 को एक रोबोटिक पनडुब्बी REMUS 600 ने सैन जोस को आधिकारिक तौर पर ढूंढ लिया.
यह पनडुब्बी अमरीका की वूड्स होल ओशियनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन की थी. करीब 4 मीटर लंबी यह स्वचालित पनडुब्बी समुद्र तल के नीचे 6 किलोमीटर गहराई तक तलहटी की छानबीन कर सकती है.
यह सैन जोस से 9 मीटर की ऊंचाई तक उतरकर उसकी तस्वीरें लेने में सक्षम थी. इसने तोपों की तांबे की नाल की तस्वीरें लीं जिन पर डॉल्फिन की आकृतियां खुदी हुई थीं. शोधकर्ताओं ने उसी से सैन जोस की पहचान की.
कोलंबियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एंथ्रोपोलॉजी एंड हिस्ट्री के निदेशक अर्नेस्टो मोंटेनेग्रो कहते हैं, "सैन जोस गैलियन औपनिवेशिक इतिहास से संबंधित सूचनाओं का केंद्र है."
"यह अमरीकी क्षेत्र में यूरोप, ख़ासकर स्पेन के करीब 300 साल लंबे औपनिवेशिक युग का प्रतिनिधि है."
कोलंबिया तट के पास करीब 1,000 जहाज डूबने का अनुमान है, जो ढूंढे जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.
सैन जोस गैलियन को कोलंबिया के समुद्र में ढूंढ लिया गया है, लेकिन इस बात की गारंटी नहीं है कि वह इसकी सीमाओं में ही रहेगा.
की पोर्ट सिटी पोर्टोबेलो से चला था. इस पर सोना, चांदी और बेशकीमती जवाहरात लदे थे, जिनको स्पेन के नियंत्रण वाले पेरू के खदानों से निकाला गया था.
अनुमान है कि आज के हिसाब से उसकी कीमत 10 अरब डॉलर से 20 अरब डॉलर के बीच रही होगी.
यह दौलत स्पेन के राजा फिलिप पंचम के लिए थी, जो स्पेन के उत्तराधिकार की लड़ाई में उपनिवेशों से मिले धन पर आश्रित थे.
चार साल बाद गैलियन अब भी कोलंबिया के समुद्र में तल से 600 मीटर नीचे पड़ा हुआ है. जहाज़ पर लदी दौलत के कई दावेदार सामने आ गए हैं.
डूबे हुए गैलियन को समुद्री जहाज़ो के मलबे का "होली ग्रेल" कहा जाता है. कोलंबिया की सरकार ने ये नहीं बताया कि वो डूबा कहाँ था.
माना जाता है कि सैन जोस कार्टाजेना से करीब 40 किलोमीटर दूर रोजेरियो द्वीपसमूह के पास डूबा है. इन द्वीपों पर उष्णकटिबंधीय जंगल हैं जो नेशनल पार्क का हिस्सा हैं.
कई छोटे मोटरबोट रोज़ाना सैलानियों को वहां ले जाते हैं. समुद्र तल पर गुज़रते हुए यह कल्पना करना कठिन नहीं है कि नीचे कहीं सैन जोस का ख़ज़ाना पड़ा हुआ है.
ख़ज़ाने से भरे जहाज़ सदियों से लोगों को रोमांचित करते रहे हैं. नोबेल पुरस्कार से सम्मानित लेखक गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़ ने "लव इन दि टाइम ऑफ कॉलेरा" में गैलियन के बारे में लिखा है.
इस उपन्यास का मुख्य पात्र फ्लोरेन्टिनो एरिज़ा समुद्र की तलहटी तक जाने और सैन जोस के ख़ज़ाने को लाने की योजना बनाता है.

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