गुरतेज के दोनो बेटे अब बड़े हो रहे हैं

गुरतेज के दोनो बेटे अब बड़े हो रहे हैं. पर वो न तो ख़ुद खेती में लौटना चाहते हैं और न ही बच्चों को किसान बनाना चाहते हैं. वह कहते हैं, “जितनी खेती मैंने की है उससे मुझे यही लगा की किसानी में न ही पड़ें तो अच्छा.
खेती से तो अच्छा है कि बच्चे कोई दुकान खोल लें या मज़दूरी कर लें या किसी फ़ैक्टरी में लग जाएं. खेती में आमदनी होती नहीं, किसान के ख़र्चे बढ़ते जा रहे हैं. इसलिए जब कोई रास्ता नहीं दिखता तो वह सुसाइड कर लेता है. खेती में कुछ नहीं मिलना, उल्टा जान ज़रूर जानी है.”
बदरा गांव से विदा लेते हुए ही हमें पड़ोस के संगरूर जिले के खोखर खुर्द गांव में एक 23 साल के किसान की आत्महत्या की ख़बर मिली.
कर्ज़ और बैंक के नोटिसों ने परेशान नमृत पाल ने 14 जून 2018 की रात रेल की पटरी पर लेटकर आत्महत्या कर ली. पीछे दो छोटे बच्चे, पत्नी और बूढ़े माँ-बाप को छोड़ गए नमृत अक्सर उदास रहते और अपनी माँ से कहते, ‘माँ मेरा मरने को जी करता है’. अपनी शादी की तस्वीर में नमृत किसी नौजवान रंगरूट की तरह लगते हैं. अपने पिता के मातम में मासूमियत से चिप्स खाते उनके बच्चे, उनको ‘लाड़ी-लाड़ी’ कहकर पुकारती उनकी पत्नी और दहाड़ें मार मार कर रोती उनकी माँ गुरमीत कौर को देखकर पंजाब की एक स्याह तस्वीर मेरे सीने में धंस गई.
आगे पंजाब छोड़ते हुए हमारी मुलाक़ात ‘भारतीय किसान यूनियन एकता-उगराहन’ नामक स्थानीय किसान संगठन के बैनर तले एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे किसानों से हुई. पीले झंडे लिए जत्थों में चलते हुए ये किसान सरकार की ओर से धान की रोपाई की तय तारीख़ के ख़िलाफ़ अपना विरोध जताने बरनाला शहर जा रहे थे.
मैंने वहां खड़े किसानों से बातचीत में पूछा कि हरित क्रांति की इस धरती पर आज इतने किसान ख़ुदकुशी क्यों कर रहे हैं.
तभी अपने संगठन का झंडा हाथ में पकड़े एक बुज़ुर्ग किसान ने अपना नाम बारह सिंह बताते हुए कहा, “हरित क्रांति से सिर्फ़ बीज कंपनियों, पेस्टीसाइड कंपनियों और ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनियों का फ़ायदा हुआ है. हमें महंगे बीज, महंगी खाद बेच गए कंपनी वाले. बड़े ट्रैक्टरों बेच के मुनाफ़ा कमा गई कंपनियां. हमें क्या मिला? सिर्फ़ इन सामनों को ख़रीदने के लिए लिया गया कर्ज़ा.
कभी कीड़ों से तो कभी ओलों से फ़सल ख़राब हो जाती है. सरकार की तरफ़ से कोई मुआवज़ा या लोन माफ़ी नहीं मिलती. हर बार सरकार पंजाब के किसानों के संकट को सिर्फ़ कमेटियों की सिफ़ारिशों में दबा के रख देना चाहती है.
ज़मीन पर मिमिनम सपोर्ट प्राइस पर फ़सल बेचने के लिए भी हमें लड़ाइयां लड़नी पड़ती हैं. ऐसे में किसान आत्महत्या न करे तो और क्या करे”. जुलाई को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को उनकी मुआवज़ा और राहत नीति पर फटकार लगाते हुए कहा कि मुआवज़ा सिर्फ एक अंतरिम उपाय है.
सरकार को बढ़ती किसान आत्महत्यायों के कारणों पर एक हलफनमा दाख़िल करने का आदेश देते हुए अदालत यह भी पूछा की सरकार बढ़ती किसान आत्महत्यायों को रोकने के लिए क्या दीर्घकालिक उपाय कर रही है. फिलहाल सरकार अदालत में प्रस्तुत करने के लिए जवाब तैयार कर रही है पर इस जवाब का असली इंतज़ार तो पंजाब के किसानों को है.
अपना आख़िरी टेस्ट मैच खेल रहे एलेस्टर कुक ने शतक लगाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. वैसे तो वे ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी नहीं हैं.
लेकिन उनका आख़िरी टेस्ट शतक इसलिए ख़ास है, क्योंकि उन्होंने अपने पहले टेस्ट में भी शतक लगाया था. ऐसा करने वाले वे इंग्लैंड के पहले क्रिकेटर हैं.
पहले और आख़िरी टेस्ट में शतक लगाने वाले खिलाड़ियों में भारत के मोहम्मद अज़हरुद्दीन के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल, रेजिनाल्ड डफ़ और विलियम पोन्सफोर्ड शामिल हैं.
एलेस्टर कुक ने भारत के ख़िलाफ़ ही अपना पहला टेस्ट खेला था और आख़िरी टेस्ट भी वे भारत के ख़िलाफ़ खेल रहे हैं.
वर्ष 2006 में एक से पाँच मार्च तक नागपुर में हुआ भारत और इंग्लैंड का टेस्ट मैच कुक का पहला टेस्ट मैच था. उस टेस्ट की पहली पारी में कुक ने 60 और दूसरी पारी में 104 रन बनाए थे.
जबकि भारत के ख़िलाफ़ अपने करियर का आख़िरी टेस्ट मैच खेल रहे कुक ने पहली पारी में 71 रन बनाए थे. दूसरी पारी में फ़िलहाल वे शतक बनाकर खेल रहे हैं. ये उनके करियर का 33वाँ शतक है.
वर्ष 2017 के दिसंबर के बाद से उन्होंने पहली बार शतक लगाया है.
पिछले सप्ताह इंग्लैंड की ओर से सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वाले एलेस्टर कुक ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी.
59 टेस्ट मैचों में अपने देश की कप्तानी करने वाले कुक ने कहा कि उन्होंने जितना सोचा था, उससे ज़्यादा हासिल किया है.
भारत के ख़िलाफ़ मौजूदा टेस्ट सिरीज़ इंग्लैंड पहले ही 3-1 से जीत चुका है.
दुनियाभर में टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले कुक छठे खिलाड़ी हैं. पहले नंबर पर भारत के सचिन तेंदुलकर हैं.
संन्यास की घोषणा के समय उन्होंने अपने बयान में कहा था, "मैं जानता हूँ कि ये सही समय है. हालांकि मेरे लिए ये एक पीड़ा का विषय भी है. ये सोचकर मुझे दुख होता है कि आने वाले समय में अब मैं अपने साथी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर नहीं कर पाऊँगा."

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